महिला कुश्ती में भरपूर संभावनाओं को देख रहे हैं भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष

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2008 के बीजिंग ओलंपिक में भारत ने कुश्ती में पदक क्या जीता मानो अंधेरे में चुपचाप दफ्न हो रही कुश्ती को संजीवनी मिल गई हो। अचानक से पूरे हिंदुस्तान की जुंबा पर कुश्ती मानो चाश्नी की तरह चिपक गई हो। चारों ओर कुश्ती की चर्चा होने लगी और एक ऐसी हवा चली की लोग कुश्ती में अपना भविष्य तलाशने लगे और इस फेहरिस्त में सिर्फ पुरुष पहलवानों का नाम शुमार नहीं है बल्कि महिला पहलवान भी इसमें शामिल हैं जिन्होंने कुश्ती में ना सिर्फ खुद को साबित किया बल्कि देश का मान और सम्मान भी बढ़ाया। इसी मसले पर भारतीय कुश्ती महासंध के अध्यक्ष बृजभूषण शरण का कहना है कि ‘रियो ओलंपिक में महिला पहलवानों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, और पुरुषों की कुश्ती और महिलाओं की कुश्ती में कोई फर्क नहीं है। जितनी मेहनत पुरुष पहलवान करते हैं उतनी ही मेहनत महिला पहलवान भी करती हैं। इसलिए इनमें कोई फर्क नहीं करना चाहिए और महिला पहलवानों और प्रोत्साहित करना चाहिए ताकि महिला पहलवान देश को और पदक दिला सकें।‘

लगातार बढ़ रहा है महिला पहलवानों का ग्राफ

2012 में लंदन में हुए ओलंपिक में भारत की सिर्फ एक महिला पहलवान गीता फौगाट ही शिरकत कर पाईं थी। जबकि 2008 के बीजिंग ओलंपिक के लिए कोई भी महिला पहलवान क्वालिफाई नहीं कर पाई थी। वहीं 2016 के रियो ओलंपिक में तीन महिला पहलवानों ने दस्तक दी थी जिसमें से साक्षी मलिक ने देश को पदक भी दिलाया। अब इन पहलवानों की नज़र 2020 के टोक्यो ओलंपिक पर है।

कॉमनवेल्थ गेम्स में दिखा महिला पहलवानों का दबदबा

2014 के कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय महिला पहलवानों ने जबरदस्त खेल का प्रदर्शन किया और कुल 6 मेडल अपने नाम किए। जिनमें 2 गोल्ड 3 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज मेडल शामिल है।

बात 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों की करें जिसका आयोजन देश की राजधानी दिल्ली में हुआ था, इसमें भी महिला पहलवानों ने 6 पदक अपने नाम किया था जिसमें 3 गोल्ड 2 सिल्वर और 1 ब्रॉन्ज मेडल शामिल है।

इन आंकड़ों को देखने के बाद और भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृजभूषण शरण की कोशिशों को समझने के बाद उम्मीद जताई जा सकती है कि आने वाले दिनों में भारत की महिला पहलवान अपने दांव-पेचों से कुश्ती की किताब में ऐसे रंग भर देंगी जो हमेशा अपनी मौजूदगी की गवाही देगा।

2 टिप्पणी

  1. It is requested that haryana govt. must think for the Ex-players too as they are giving job to the medial winners of 2005 to 2016. What about the Awardees and medal winners of 2004? Their is a job and everything in the sports policy who got the Award and medial after 2004. Even they can give the land to the Ex- Outstanding players or Awardee in the each game for their Game Academy.

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